Kanva
Ashram is 14 km from Kotdwar It is believed that Indra, the king of
Gods, was scared by Sage Vishwamitra's meditation, and sent a
beautiful heavenly damsel named Menaka, who finally succeeded in
diverting Vishwamitra's attention. She gave birth to a girl who later
became Shakuntala and married the prince of Hastinapur. She gave
birth to Bharat, the prince after whom our country is called
Bharatvarsh.Thursday, November 26, 2015
Top Places To Visit in Kotdwara and Their Specialties
Kanva
Ashram is 14 km from Kotdwar It is believed that Indra, the king of
Gods, was scared by Sage Vishwamitra's meditation, and sent a
beautiful heavenly damsel named Menaka, who finally succeeded in
diverting Vishwamitra's attention. She gave birth to a girl who later
became Shakuntala and married the prince of Hastinapur. She gave
birth to Bharat, the prince after whom our country is called
Bharatvarsh.Monday, February 10, 2014
Hanuman Ashtak Hindi
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,तीनहुं लोक भयो अंधियारों I
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो I
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो I को - १
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो I
चौंकि महामुनि साप दियो तब ,
चाहिए कौन बिचार बिचारो I
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो I को - २
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो I
जीवत ना बचिहौ हम सो जु ,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब ,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो I को - ३
रावण त्रास दई सिय को सब ,
राक्षसी सों कही सोक निवारो I
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,
जाए महा रजनीचर मरो I
चाहत सीय असोक सों आगि सु ,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I को - ४
बान लाग्यो उर लछिमन के तब ,
प्राण तजे सूत रावन मारो I
लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I
आनि सजीवन हाथ दिए तब ,
लछिमन के तुम प्रान उबारो I को - ५
रावन जुध अजान कियो तब ,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो I
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल ,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु ,
बंधन काटि सुत्रास निवारो I को - ६
बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो I
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि ,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो I
जाये सहाए भयो तब ही ,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो I को - ७
काज किये बड़ देवन के तुम ,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो I
कौन सो संकट मोर गरीब को ,
जो तुमसे नहिं जात है टारो I
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,
जो कछु संकट होए हमारो I को - ८
दोहा
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I
वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II
Tuesday, November 19, 2013
Shree Sidhbali Baba Varshik Anusthan Mela 2013
Tuesday, June 18, 2013
इलाहाबाद के संगम तट पर है लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर । यहां हनुमान जी प्रयाग के कोतवाल के रूप में स्थापित है।
संगम आने वाला प्रतेक श्रद्धालु यहां जरूर आता है। हनुमान जी के दर्शन बिना उन का पुण्य लाभ पूरा नहीं होता।
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| Lete Huye Hanuman ji |
यहां लेटे हुए हुए हनुमान जी के दर्शन को लोग दूर-दूर से आते हैं खास कर वो लोग जो संगम स्नान के लिए आते हैं। जानकार बताते है कि शायद ही दुनिया में ऐसा मंदिर होगा जहां हनुमान जी विश्राम अवस्था में है। वो इसलिए की लंका विजय के बाद मां जानकी ने हनुमान के शरीर पर सिन्दूर का लेप लगाकर उनके यहां विश्राम करने का आदेश दिया।
संगम आने वाला प्रतेक श्रद्धालु यहां जरूर आता है। हनुमान जी के दर्शन बिना उन का पुण्य लाभ पूरा नहीं होता। इलाहाबाद शहर के लोग इस मंदिर को बड़े हनुमान जी, बांध वाले हनुमान जी और लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर के नाम से जानते हैं।
Jai Hanuman Ji Ki !
Jai Sidhbalibaba Ki!
Saturday, May 11, 2013
Shri Hanuman Chalisa in Hindi (Jai Sidhbali Baba)
॥दोहा॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥
॥चौपाई॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥
कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥
सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥
सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥
तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥
आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥
चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥
तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥
॥दोहा॥
पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥
http://sidhbalibaba.com/
Tuesday, December 4, 2012
जय श्री सिद्धबली बाबा कोटद्वार
श्री सिद्धबली बाबा मंदिर खोह नदी के तट पर स्थित है, और शिवालिक पहाड़ियों से घिरा हुआ है | यह मंदिर कुछ वर्ष पूर्व, भूस्खलन के कारण एक तिहाही तक ध्वस्त हो गया था, लेकिन आश्चर्य जनक रूप से अपने स्थान पर ही टिका रहा, और आज भी शहर के ऊंचाई में अपनी शान के साथ स्थित है | ऐसी मान्यता है कि जीर्ण अवस्था के समय, स्वयं हनुमान जी ने मंदिर को अपने कन्धों पर सहारा दिया था |
यहाँ पर भक्तों द्वारा विश्वास किया जाता है कि जो भी पवित्र भावना से कोई मनोती श्री सिद्धबली बाबा से मांगता है, अवश्य पूर्ण होती है। मनोती पूर्ण होने पर भक्तजन भण्डारा आदि करते हैं। श्री सिद्धबली बाबा को बरेली, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बिजनौर, हरिद्वार आदि तक की भूमि का क्षेत्रपाल देवता के रूप में भी पूजा जाता है।
यहाँ पर रविवार, मंगलवार एवं शनिवार को भण्डारे करने की परम्प्रा है। लेकिन रविवार को भण्डारा करने की विशेष महत्व है।
श्री सिद्धबली बाबा को आटा, गुड़, घी, भेली से बना रोट एवं नारियल का प्रसाद चढ़ता है एवं हनुमान जी को सवा हाथ का लंगोट व चोला भी चढ़ता है। प्रात: ब्रमुहर्त में पुजारियों द्वारा पिण्डियों (जिनकी पूजा स्वयं सिद्धबाबा जी शिव शक्ति के रूप में करते थे) की अभिषेक पूजा की जाती है, तत्पश्चात् सर्वप्रथम साधुओं द्वारा बनाये गये रोट (गुड़, आटा व घी से बनी रोटी) का भोग चढ़ता है। तत्पश्चात् ही अन्य भोग चढ़ते हैं। दिसम्बर माह में पौष संक्रान्ति को श्री सिद्धबाबा का तीन दिवसीय विशाल मेला लगता है, जिसमें लगातार तीन दिन तक बड़े भण्डारे आयोजित होते हैं एवं सवा मन का रोट प्रसाद स्वरूप बनाया जाता है।
Wednesday, November 28, 2012
Tuesday, November 27, 2012
Saturday, July 24, 2010
As per the the Nath community Guru Gorakhnath and their pupil, who are known as Sidh (Saint) meditated here for long time. So many saints have been meditated here for a long time. Some of them are Baba Sitaram ji, Baba Gopal Das Ji, Baba Narayan Das Ji & saint Sevadas Ji. Falahari Baba Ji meditated here for so many years and ate only fuits. One Mohammedan saint also leved here for so many years. This place is worshiped by Hindu as well as Mohammedans.
As per the historians Saint Sidhwa (14th Centaury) also meditated here who is worshipped as Sidh in this place. During his visit in this area he meditated in four different places Sish Bali, Moda Khal, Dhaulia Uderi and Kandi Khal.
Kotdwar, the biggest business center and the only railway terminus of the district, enroute the all items for the necessities of the hill region of the district. Kotdwar is only plain town of this mountainous district having most of the industrial potential. Situated at the bank of river ‘Khoh’ in the ‘Bhabar’ region of Himalyan foothills, its altitude is 650 meters from sea level. It is one of the hottest places in the district.
Area of the city is about 2.59 sq. km. Total population as per 1991 census is 21,378 with 11,425 male populations and 9,953 female population. The nearest airport is Jollygrant, a place near to Deharadun at a distance of 115 km. via Haridwar.
The famous religious places around the city are Siddhbali and Durgadevi Temple. The excursions from the city are Kanvashram, Bharat Nagar, Chila, Kalagarh, Medanpuri Devi, Shri Koteshwar Mahadev.








